किस भरम में खो गया है तू बता...

किस भरम में खो गया है तू बता,
आइना तुझको पुकारे लौट आ.


अनसुनी करके तू खुद की दूसरों की सुन रहा,
जग के सांचों में भला क्यों धीरे धीरे ढल रहा,
पूछ तू खुद से ज़रा खुद का पता,
आइना तुझको पुकारे लौट आ.


क्या भला है क्या बुरा है फैसला तू खुद ही कर, 
क्या पता कब सहर होगी तू उजाला खुद ही कर,
आपने भीतर के अंधेरों को जला
आइना तुझको पुकारे लौट आ.


जुस्तजू है खुद की फिर भी दूर खुद से जा रहा
हैं गिले दुनिया से लेकिन खुद से ही टकरा रहा
आपने मन के डर का कर ले सामना
आइना तुझको पुकारे लौट आ.

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